Gurindervir Singh कौन हैं?
कभी-कभी खेल की दुनिया में ऐसी कहानियां सामने आती हैं, जो सिर्फ रिकॉर्ड की बात नहीं करतीं बल्कि मेहनत, सपनों और जिद की भी मिसाल बन जाती हैं। सोचिए, पंजाब के एक छोटे से गांव का लड़का, जिसके पास बचपन में बड़ी सुविधाएं नहीं थीं, जो खेतों और गांव की गलियों में दौड़ता था, वही लड़का एक दिन पूरे देश का सबसे तेज धावक बन जाए। यह कहानी किसी फिल्म की स्क्रिप्ट जैसी लग सकती है, लेकिन यह असल कहानी है गुरिंदरवीर सिंह की।
आज जब लोग भारतीय एथलेटिक्स की बात करते हैं, तो गुरिंदरवीर सिंह का नाम तेजी से चर्चा में आ रहा है। उन्होंने सिर्फ दौड़ नहीं लगाई, बल्कि भारतीय स्प्रिंटिंग के इतिहास में एक नया अध्याय भी लिखा है। 23 मई 2026 को उन्होंने वह काम कर दिखाया, जिसका इंतजार भारतीय खेल प्रेमी कई वर्षों से कर रहे थे।
Gurindervir Singh की संक्षिप्त जानकारी
| जानकारी | विवरण |
|---|---|
| Full Name | Gurindervir Singh |
| Date Of Birth | 24 December 2000 |
| आयु | 25 वर्ष |
| जन्म स्थान | पंजाब, भारत |
| पेशा | भारतीय धावक और भारतीय नौसेना अधिकारी |
| खेल | Athelatics |
| Event | Sprinting |
| 60 मीटर रिकॉर्ड | 6.60 सेकंड (राष्ट्रीय रिकॉर्ड) |
| 100 मीटर रिकॉर्ड | 10.09 सेकंड (राष्ट्रीय रिकॉर्ड) |
| 4×100 मीटर रिले | 38.69 सेकंड (राष्ट्रीय रिकॉर्ड) |
Gurindervir Singh की शुरुआत कैसी थी?
Gurindervir Singh पंजाब के जालंधर जिले के भोगपुर कस्बे के पास स्थित पटियाल गांव से आते हैं। उनका बचपन किसी बड़े शहर की चमक-दमक के बीच नहीं बीता। गांव का माहौल, खेतों की हरियाली और साधारण जीवन ही उनकी दुनिया थी। उस समय शायद किसी ने भी नहीं सोचा होगा कि यही बच्चा आगे चलकर भारत की स्प्रिंटिंग का चेहरा बन जाएगा।
बचपन में उन्हें दौड़ना बहुत पसंद था। अक्सर छोटे बच्चे खेल-खेल में दौड़ते हैं, लेकिन Gurindervir Singh की दौड़ में कुछ अलग था। उनकी रफ्तार बाकी बच्चों से ज्यादा थी। परिवार और आसपास के लोगों ने भी धीरे-धीरे यह महसूस करना शुरू किया कि इस बच्चे के अंदर कुछ खास है।
Gurindervir Singh के जिंदगी में बड़ा मोड़ कैसे आया?
हर खिलाड़ी की जिंदगी में एक ऐसा समय आता है, जब सही मार्गदर्शन उसकी दिशा बदल देता है। Gurindervir Singh के जीवन में भी ऐसा ही हुआ। उन्हें जालंधर जाकर प्रशिक्षण लेने का मौका मिला। वहां उन्होंने कोच सरबजीत सिंह के मार्गदर्शन में पंजाब इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स (PIS) अकादमी में ट्रेनिंग शुरू की।
यह उनके जीवन का बड़ा मोड़ साबित हुआ। गांव से निकलकर अब वह ऐसे माहौल में थे, जहां उन्हें पेशेवर प्रशिक्षण मिल रहा था। यहां उन्होंने सिर्फ तेज दौड़ना नहीं सीखा, बल्कि दौड़ के पीछे की पूरी विज्ञान को समझा। उन्होंने सीखा कि कदमों की लंबाई कैसी होनी चाहिए, सांस लेने का तरीका कैसा होना चाहिए और दौड़ के दौरान दिमाग को किस तरह नियंत्रित करना चाहिए।
धीरे-धीरे उनकी गति और प्रदर्शन में सुधार आने लगा। मेहनत का असर मैदान पर साफ दिखने लगा था।

राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाकर इतिहास कैसे रचा?
भारत में लंबे समय से यह चर्चा होती रही कि आखिर कोई भारतीय धावक 100 मीटर की दौड़ में 10.10 सेकंड का आंकड़ा कब तोड़ेगा। यह एक ऐसा रिकॉर्ड था जो भारतीय स्प्रिंटिंग के लिए बहुत बड़ा माना जा रहा था।
23 मई 2026 का दिन भारतीय एथलेटिक्स के लिए यादगार बन गया। रांची में आयोजित राष्ट्रीय सीनियर एथलेटिक्स फेडरेशन प्रतियोगिता में गुरिंदरवीर सिंह ने 100 मीटर की दौड़ सिर्फ 10.09 सेकंड में पूरी कर दी।
यह सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं था। वह पहले भारतीय धावक बन गए जिन्होंने 10.10 सेकंड की बाधा को पार किया। इस उपलब्धि ने उन्हें देशभर में पहचान दिला दी।
जब खिलाड़ी रिकॉर्ड बनाते हैं, तो आंकड़े सिर्फ कागज पर नहीं बदलते बल्कि लोगों की सोच भी बदलती है। गुरिंदरवीर ने दिखा दिया कि भारतीय खिलाड़ी भी विश्व स्तर की गति हासिल कर सकते हैं।
Gurindervir Singh के प्रमुख पदक और उपलब्धियां कैसी रहीं?
Gurindervir Singh का सफर सिर्फ एक रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने कम उम्र से ही कई बड़े मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व किया और पदक भी जीते।
| प्रतियोगिता | उपलब्धि |
|---|---|
| दक्षिण एशियाई खेल 2019 | 4×100 मीटर रिले में रजत पदक |
| एशियाई अंडर-20 चैंपियनशिप 2018 | कांस्य पदक |
| एशियाई अंडर-18 चैंपियनशिप 2017 | 100 मीटर में स्वर्ण पदक |
| एशियाई अंडर-18 चैंपियनशिप 2017 | मेडले रिले में स्वर्ण पदक |
इन उपलब्धियों से यह साफ दिखाई देता है कि वह धीरे-धीरे लगातार आगे बढ़ते रहे हैं। उनकी सफलता अचानक नहीं आई, बल्कि कई वर्षों की मेहनत और संघर्ष का नतीजा है।
Indian Navy से जुड़ने के पीछे क्या कहानी है?
बहुत कम लोग जानते हैं कि Gurindervir Singh सिर्फ एथलीट ही नहीं बल्कि भारतीय नौसेना के अधिकारी भी हैं। खेल और देश सेवा दोनों जिम्मेदारियां एक साथ निभाना आसान नहीं होता।
नौसेना में रहते हुए अनुशासन, फिटनेस और मानसिक मजबूती पर बहुत ध्यान दिया जाता है। शायद यही कारण है कि उनके खेल जीवन में भी अनुशासन की झलक दिखाई देती है। खिलाड़ी के लिए शरीर जितना जरूरी होता है, उतना ही मजबूत दिमाग भी जरूरी होता है।
Gurindervir Singh की कहानी युवाओं को क्या सिखाती है?
Gurindervir Singh की कहानी यह नहीं कहती कि सफलता सिर्फ बड़े शहरों या महंगी सुविधाओं से मिलती है। उनकी कहानी यह बताती है कि अगर प्रतिभा के साथ मेहनत और सही दिशा मिल जाए, तो रास्ते खुद बनते चले जाते हैं।
आज गांवों में रहने वाले हजारों युवा खेलों में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। Gurindervir Singh उनके लिए एक उदाहरण बन सकते हैं। उन्होंने साबित किया कि छोटे गांव से निकलने वाला खिलाड़ी भी बड़े रिकॉर्ड बना सकता है।
उनकी यात्रा अभी खत्म नहीं हुई है। आने वाले समय में लोग उनसे और बड़े प्रदर्शन की उम्मीद कर रहे हैं। अब नजरें इस बात पर हैं कि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के लिए और कौन-कौन से नए रिकॉर्ड बना सकते हैं।
एक बात जरूर है , जब भी भारत के सबसे तेज धावकों की चर्चा होगी, Gurindervir Singh का नाम लंबे समय तक याद रखा जाएगा।




