पालकी शर्मा उपाध्याय: खबरों को समझाने वाली आवाज़
आज के दौर में खबरें हर जगह हैं—टीवी पर, मोबाइल पर, सोशल मीडिया पर। लेकिन सच कहें तो ज़्यादातर खबरें इतनी उलझी हुई होती हैं कि आम आदमी समझ ही नहीं पाता कि असल बात क्या है। ऐसे समय में अगर कोई पत्रकार कठिन से कठिन विषय को आसान भाषा में, शांति से और असरदार ढंग से समझा दे, तो वह भीड़ से अलग नज़र आता है। पालकी शर्मा उपाध्याय ऐसी ही एक पत्रकार हैं, जिन्होंने खबरों को सिर्फ बताया नहीं, बल्कि समझाया।
शुरुआती जीवन और सादगी भरी परवरिश
पालकी शर्मा उपाध्याय का जन्म 29 मई 1982 को राजस्थान के पिलानी में हुआ। उनका बचपन साधारण माहौल में बीता, जहां पढ़ाई और समझदारी को सबसे ज़्यादा अहमियत दी जाती थी। मूल रूप से वह दिल्ली से ताल्लुक रखती हैं और आज भी उनकी बातचीत में एक सादगी और ठहराव साफ महसूस होता है।
उनका स्वभाव शुरू से जिज्ञासु रहा है। वह हर चीज़ को गहराई से समझना चाहती थीं—चाहे वह समाज हो, राजनीति हो या दुनिया की घटनाएं। यही आदत आगे चलकर उनके पत्रकार बनने की नींव बनी।
पत्रकारिता की शुरुआत और मेहनत का दौर
पालकी शर्मा ने अपने करियर की शुरुआत पत्रकारिता के क्षेत्र में पूरे समर्पण के साथ की। उन्होंने CNN-IBN में लगभग ग्यारह साल तक काम किया। यह समय उनके लिए सीखने और खुद को निखारने का था। यहां उन्होंने न्यूज़ रूम की असली दुनिया को जाना—तेज़ खबरें, दबाव, समय की कमी और सटीक जानकारी की ज़रूरत।
इस लंबे अनुभव ने उन्हें एक मजबूत पत्रकार बनाया। उन्होंने सीखा कि खबर सिर्फ जल्दी दिखाना ही नहीं, बल्कि सही और संतुलित तरीके से पेश करना भी ज़रूरी है।
WION और ‘Gravitas’ से मिली नई पहचान
CNN-IBN के बाद पालकी शर्मा ने WION यानी World Is One News में कदम रखा। यहीं से उन्हें असली पहचान मिली। उन्होंने ‘Gravitas’ नाम का प्राइम टाइम शो होस्ट किया, जो भारत का एकमात्र अंतरराष्ट्रीय खबरों और विचारों पर आधारित शो था।
‘Gravitas’ में पालकी शर्मा का अंदाज़ बिल्कुल अलग था। न चिल्लाना, न डर फैलाना—बस ठोस तथ्य, साफ भाषा और सीधी बात। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय राजनीति, युद्ध, वैश्विक ताकतों और भारत की भूमिका को इस तरह समझाया कि आम दर्शक भी खुद को उससे जुड़ा महसूस करने लगा।
Firstpost और डिजिटल मीडिया की दुनिया
इसके बाद पालकी शर्मा उपाध्याय ने Firstpost जॉइन किया, जो भारत का एक बड़ा डिजिटल और यूट्यूब न्यूज़ प्लेटफॉर्म है। यहां उन्होंने ‘Flashback’ और ‘Between the Lines’ जैसे प्रोग्राम शुरू किए, जो देखते ही देखते काफी लोकप्रिय हो गए।
इन कार्यक्रमों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि जटिल मुद्दों को बहुत कम समय में, सरल शब्दों में समझाया जाता है। यही वजह है कि युवा दर्शक, जो लंबे टीवी डिबेट से दूर भागते हैं, पालकी शर्मा को ध्यान से सुनते हैं।

खबरें नहीं, समझ बनाना
पालकी शर्मा की पत्रकारिता की सबसे बड़ी ताकत यह है कि वह खबरों को सिर्फ पेश नहीं करतीं, बल्कि उनका मतलब भी बताती हैं। वह सवाल उठाती हैं, लेकिन शोर नहीं मचातीं। उनकी आवाज़ में आत्मविश्वास होता है, लेकिन घमंड नहीं।
आज जब मीडिया पर पक्षपात और एजेंडा चलाने के आरोप लगते हैं, तब पालकी शर्मा खुद को तथ्यों और तर्कों तक सीमित रखती हैं। यही बात उन्हें भरोसेमंद बनाती है।
डिजाइन की दुनिया और रचनात्मक सोच
बहुत कम लोग जानते हैं कि पालकी शर्मा सिर्फ पत्रकार ही नहीं, बल्कि एक डिजाइनर भी हैं। दरअसल, उनका सपना शुरू में डिजाइनर बनने का था। इसी शौक ने उन्हें ‘Reyva’ नाम का एक साड़ी ब्रांड शुरू करने के लिए प्रेरित किया।
उनकी साड़ियां उनकी सोच की तरह ही सादगी और शालीनता को दर्शाती हैं। यह दिखाता है कि पालकी शर्मा की रचनात्मकता सिर्फ शब्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि कपड़ों और डिज़ाइन में भी झलकती है।
एक महिला पत्रकार के रूप में पहचान
भारतीय मीडिया में महिला पत्रकारों के लिए रास्ता आसान नहीं रहा है। लेकिन पालकी शर्मा ने बिना किसी दिखावे के, अपनी मेहनत और समझदारी से अपनी जगह बनाई। उन्होंने साबित किया कि गंभीर पत्रकारिता के लिए ऊंची आवाज़ या आक्रामकता ज़रूरी नहीं होती।
उनकी मौजूदगी कई युवा लड़कियों के लिए प्रेरणा है, जो पत्रकारिता में करियर बनाना चाहती हैं।
निजी जीवन और संतुलन
पालकी शर्मा अपने निजी जीवन को लाइमलाइट से दूर रखती हैं। वह मानती हैं कि एक पत्रकार की पहचान उसके काम से होनी चाहिए, न कि उसकी निजी ज़िंदगी से। यही संतुलन उन्हें ज़मीन से जुड़ा रखता है।
काम और व्यक्तिगत रुचियों के बीच संतुलन बनाना भी उनकी सफलता का एक बड़ा कारण है।
आज की मीडिया में पालकी शर्मा की भूमिका
आज के समय में जब खबरें मिनटों में बदल जाती हैं और अफवाहें तेजी से फैलती हैं, पालकी शर्मा जैसी पत्रकारों की ज़रूरत और भी बढ़ जाती है। वह दर्शकों को सोचने का मौका देती हैं, न कि डराने का।
उनकी शैली यह सिखाती है कि पत्रकारिता सिर्फ पेशा नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है।
निष्कर्ष: भरोसे की आवाज़
पालकी शर्मा उपाध्याय आज सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि एक भरोसे की पहचान बन चुकी हैं। उन्होंने दिखाया है कि सच्ची पत्रकारिता आज भी ज़िंदा है—बस उसे सही तरीके से पेश करने की ज़रूरत है।
खबरों की भीड़ में अगर कोई आवाज़ ठहराव, समझ और संतुलन के साथ सामने आती है, तो वह है पालकी शर्मा की आवाज़।




