ईशान किशन: बिहार की गलियों से भारतीय क्रिकेट तक का जुनूनी सफर
जब भी भारतीय क्रिकेट में आक्रामक बल्लेबाज़ी, बेखौफ अंदाज़ और मैदान पर ऊर्जा की बात होती है, तो ईशान किशन का नाम अपने-आप ज़ुबान पर आ जाता है। छोटे कद का यह खिलाड़ी, जिसकी आंखों में बड़े सपने और बल्ले में तूफानी ताकत है, आज भारतीय क्रिकेट का जाना-पहचाना चेहरा बन चुका है। लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने की कहानी आसान नहीं थी। यह कहानी है बिहार की मिट्टी, परिवार के संस्कार, संघर्ष, और कभी न हार मानने वाले जज़्बे की।
जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि
भारतीय क्रिकेटर ईशान किशन का जन्म 18 जुलाई 1998 को पटना, बिहार में हुआ था। वे एक भूमिहार ब्राह्मण परिवार से आते हैं, जिसे भारतीय समाज में उच्च जाति के रूप में जाना जाता है। हालांकि ईशान की पहचान कभी उनकी जाति से नहीं, बल्कि उनके खेल और मेहनत से बनी। उनके पिता का नाम प्रणव कुमार पांडे है, जो पेशे से एक बिल्डर हैं और दवा व्यवसाय से भी जुड़े रहे हैं। ईशान की मां ने भी हर कदम पर बेटे का साथ दिया, भले ही उनका नाम ज्यादा सुर्खियों में न आया हो।
ईशान के परिवार में एक बड़े भाई राज किशन भी हैं, जिन्होंने बचपन से ईशान को क्रिकेट के लिए प्रेरित किया। परिवार का माहौल पढ़ाई और मेहनत को लेकर गंभीर था, लेकिन क्रिकेट के लिए जुनून को कभी रोका नहीं गया। यही वजह रही कि ईशान को बहुत कम उम्र में ही अपने सपनों के पीछे भागने की आज़ादी मिल गई।
बिहार की मिट्टी और शुरुआती क्रिकेट
ईशान किशन की क्रिकेट यात्रा की शुरुआत बिहार से हुई। पटना की गलियों और छोटे मैदानों में खेलते हुए उन्होंने क्रिकेट की बारीकियां सीखीं। बचपन से ही वे बाकी बच्चों से अलग दिखने लगे थे। उनका खेलने का अंदाज़ आक्रामक था और विकेटकीपिंग में भी वे काफी फुर्तीले थे। कोच और सीनियर खिलाड़ी जल्दी समझ गए थे कि इस लड़के में कुछ खास है।
हालांकि उस समय बिहार क्रिकेट की हालत अच्छी नहीं थी। संसाधनों की कमी, सही प्लेटफॉर्म का अभाव और राजनीति से भरा सिस्टम कई प्रतिभाओं को आगे बढ़ने से रोक देता था। ईशान के सामने भी यही चुनौती थी। लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय एक बड़ा फैसला लिया, जिसने उनकी जिंदगी बदल दी।
झारखंड की ओर रुख और करियर का टर्निंग पॉइंट
जब बिहार क्रिकेट में मौके सीमित दिखने लगे, तो ईशान किशन ने झारखंड से खेलने का फैसला किया। यह फैसला आसान नहीं था, क्योंकि राज्य बदलने का मतलब था नई टीम, नया माहौल और खुद को फिर से साबित करना। लेकिन झारखंड की धरती, जिसने पहले ही महेंद्र सिंह धोनी जैसे खिलाड़ी को दिया था, ईशान के लिए भी शुभ साबित हुई।
झारखंड टीम में उन्हें खुलकर खेलने का मौका मिला। घरेलू क्रिकेट में उनके प्रदर्शन ने सबका ध्यान खींचा। वे तेजी से रन बनाने लगे, लंबे-लंबे छक्के लगाने लगे और विकेट के पीछे भी अपनी उपयोगिता साबित की। यही वह दौर था जब ईशान किशन को भारतीय क्रिकेट के भविष्य के रूप में देखा जाने लगा।
अंडर-19 क्रिकेट और कप्तानी का अनुभव
ईशान किशन के करियर का एक अहम पड़ाव अंडर-19 क्रिकेट रहा। वे भारत की अंडर-19 टीम के कप्तान भी बने। कप्तानी के दौरान उन्होंने सिर्फ बल्लेबाज़ी ही नहीं, बल्कि नेतृत्व क्षमता भी दिखाई। उनकी कप्तानी में टीम ने अच्छा प्रदर्शन किया और ईशान खुद भी रन बनाने के मामले में आगे रहे।
यही मंच था जिसने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। चयनकर्ताओं की नजर उन पर पड़ी और आईपीएल टीमों ने भी उनमें दिलचस्पी दिखानी शुरू कर दी। अंडर-19 क्रिकेट ने ईशान को आत्मविश्वास दिया कि वे बड़े स्तर पर भी टिक सकते हैं।
आईपीएल से मिली पहचान और स्टारडम
ईशान किशन की किस्मत बदलने में इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) की बड़ी भूमिका रही। पहले गुजरात लायंस और फिर मुंबई इंडियंस जैसी बड़ी टीम से खेलने का मौका मिला। मुंबई इंडियंस के साथ रहते हुए ईशान ने खुद को एक मैच-विनर के रूप में स्थापित किया। बड़े-बड़े गेंदबाज़ों के सामने बेखौफ बल्लेबाज़ी करना उनकी पहचान बन गई।
आईपीएल में लगाए गए उनके लंबे छक्के, तेज अर्धशतक और शतक ने उन्हें फैंस का चहेता बना दिया। यही नहीं, आईपीएल ने उन्हें आर्थिक रूप से भी मजबूत किया और भारतीय टीम के दरवाज़े उनके लिए खोल दिए।

भारतीय टीम में एंट्री और अंतरराष्ट्रीय सफर
आईपीएल और घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छे प्रदर्शन के बाद ईशान किशन को भारतीय टीम में मौका मिला। उन्होंने विकेटकीपर-बल्लेबाज के रूप में अपनी जगह बनाई। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भी उनका अंदाज़ वही रहा—आक्रामक, आत्मविश्वासी और बेखौफ।
ईशान ने वनडे और टी20 क्रिकेट में कई यादगार पारियां खेलीं। उनका दोहरा शतक भारतीय क्रिकेट इतिहास का एक खास अध्याय बन गया। इतनी कम उम्र में इस तरह का कारनामा करना आसान नहीं होता, लेकिन ईशान ने यह दिखा दिया कि वे बड़े मंच के खिलाड़ी हैं।
शिक्षा और निजी जीवन
क्रिकेट के साथ-साथ ईशान किशन ने पढ़ाई को भी नजरअंदाज नहीं किया। उन्होंने पटना के कॉलेज ऑफ कॉमर्स से B.Com की पढ़ाई पूरी की। हालांकि क्रिकेट के व्यस्त करियर के कारण पढ़ाई में ज्यादा समय नहीं दे पाए, लेकिन शिक्षा को उन्होंने हमेशा सम्मान दिया।
निजी जीवन में ईशान काफी सादगी पसंद हैं। वे अपने परिवार से बेहद जुड़े हुए हैं और सोशल मीडिया पर भी अक्सर मां-पिता और भाई के साथ तस्वीरें साझा करते रहते हैं। मैदान के बाहर वे काफी शांत स्वभाव के माने जाते हैं, लेकिन मैदान पर कदम रखते ही उनका अंदाज़ पूरी तरह बदल जाता है।
जाति से आगे पहचान बनाने वाला खिलाड़ी
ईशान किशन का जन्म भले ही एक भूमिहार ब्राह्मण परिवार में हुआ हो, लेकिन उन्होंने कभी अपनी जाति को अपनी पहचान नहीं बनने दिया। आज वे जिस मुकाम पर हैं, वहां उन्हें उनके खेल, मेहनत और टैलेंट से जाना जाता है। उनकी कहानी यह सिखाती है कि असली पहचान मेहनत से बनती है, न कि जन्म से मिली किसी पहचान से।
युवाओं के लिए प्रेरणा
ईशान किशन की कहानी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो छोटे शहरों और सीमित संसाधनों के बीच बड़े सपने देखते हैं। बिहार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक पहुंचना आसान नहीं था, लेकिन ईशान ने यह कर दिखाया। उनका सफर बताता है कि अगर जुनून सच्चा हो और मेहनत लगातार की जाए, तो हालात कितने भी मुश्किल क्यों न हों, मंज़िल मिल ही जाती है।
निष्कर्ष
ईशान किशन सिर्फ एक क्रिकेटर नहीं हैं, बल्कि वे आज के युवा भारत की उस सोच का प्रतीक हैं, जो डर से नहीं, हिम्मत से खेलती है। पटना की गलियों से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम तक का उनका सफर संघर्ष, आत्मविश्वास और सपनों की जीत की कहानी है। आने वाले समय में उनसे भारतीय क्रिकेट को और भी बड़ी उम्मीदें हैं, और अगर उनका यही जज़्बा बना रहा, तो वह दिन दूर नहीं जब ईशान किशन भारतीय क्रिकेट के सबसे बड़े सितारों में गिने जाएंगे।




