भूमिका: एक साधारण शहर से IPL तक का सफर
जब भी हम भारतीय क्रिकेट की बात करते हैं, तो अक्सर बड़े नाम, बड़े शहर और बड़ी उपलब्धियां हमारे सामने आ जाती हैं। लेकिन असली क्रिकेट की खुशबू उन खिलाड़ियों से आती है जो छोटे शहरों से निकलकर अपने दम पर बड़ी पहचान बनाते हैं। ऐसा ही एक नाम है अथर्व तायडे। महाराष्ट्र के अकोला जैसे शांत शहर में जन्मा यह खिलाड़ी आज अपनी मेहनत, धैर्य और अलग पहचान के कारण क्रिकेट प्रेमियों के बीच चर्चा में रहता है। IPL में रिटायर आउट होने की वजह से सुर्खियों में आए अथर्व तायडे की जिंदगी सिर्फ एक मैच या एक फैसले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, परिवार और सपनों की लंबी कहानी है।
अथर्व तायडे की उम्र: युवा जोश और परिपक्व सोच
अथर्व तायडे का जन्म 26 अप्रैल 2000 को हुआ था। साल 2025 के हिसाब से उनकी उम्र 25 साल है। यह वह उम्र होती है जब एक खिलाड़ी के अंदर अनुभव और ऊर्जा का शानदार मेल देखने को मिलता है। अथर्व भी इसी दौर से गुजर रहे हैं, जहां वे अपने खेल को लगातार निखारने में लगे हुए हैं। 25 साल की उम्र में ही उन्होंने घरेलू क्रिकेट से लेकर IPL तक अपनी जगह बना ली है, जो यह बताता है कि आने वाले सालों में उनसे भारतीय क्रिकेट को काफी उम्मीदें हैं।
उनकी उम्र सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह उनके क्रिकेट सफर की कहानी कहती है। इतनी कम उम्र में दबाव को संभालना, टीम के लिए अलग फैसले लेना और आलोचना का सामना करना आसान नहीं होता, लेकिन अथर्व ने यह साबित किया है कि वे मानसिक रूप से मजबूत खिलाड़ी हैं।
पत्नी और वैवाहिक जीवन
क्रिकेट फैंस अक्सर अपने पसंदीदा खिलाड़ी की निजी जिंदगी के बारे में जानने को उत्सुक रहते हैं। अगर बात अथर्व तायडे की करें, तो वह फिलहाल अविवाहित हैं। उनकी कोई पत्नी नहीं है और न ही उन्होंने अभी शादी की है। इस समय उनका पूरा ध्यान अपने क्रिकेट करियर पर है। युवा उम्र में उन्होंने यह साफ कर दिया है कि पहले खेल में खुद को पूरी तरह स्थापित करना उनकी प्राथमिकता है।
अथर्व का मानना है कि जब तक करियर एक मजबूत दिशा में नहीं पहुंच जाता, तब तक निजी जिम्मेदारियों से दूर रहना बेहतर होता है। यही वजह है कि वह अपनी ट्रेनिंग, मैच प्रैक्टिस और फिटनेस पर पूरा फोकस करते हैं। उनके फैंस को उम्मीद है कि जब भी वह अपने जीवन का यह नया अध्याय शुरू करेंगे, तब भी वह उसी सादगी के साथ आगे बढ़ेंगे, जैसी सादगी उनके खेल और व्यवहार में दिखती है।

लंबाई और शारीरिक बनावट
क्रिकेट में फिटनेस का बहुत बड़ा रोल होता है और अथर्व तायडे इस बात को अच्छी तरह समझते हैं। उनकी लंबाई लगभग 173 सेंटीमीटर, यानी 5 फीट 8 इंच है। यह कद उन्हें मैदान पर संतुलन और फुर्ती दोनों देता है। ना ज्यादा लंबे और ना ही छोटे, उनकी हाइट बल्लेबाजी और फील्डिंग दोनों के लिए काफी अनुकूल मानी जाती है।
बाएं हाथ के बल्लेबाज होने के कारण उनकी शारीरिक बनावट उनके खेल में अलग तरह की सहजता लाती है। स्लो लेफ्ट आर्म ऑर्थोडॉक्स गेंदबाजी में भी उनकी लंबाई और शरीर का संतुलन मदद करता है। उनकी फिटनेस देखकर साफ लगता है कि वह सिर्फ टैलेंट पर नहीं, बल्कि मेहनत और अनुशासन पर भी पूरा भरोसा रखते हैं।जन्म
जन्म स्थान: अकोला, जहां से शुरू हुआ सपना
अथर्व तायडे का जन्म अकोला, महाराष्ट्र में हुआ था। अकोला कोई बड़ा क्रिकेट हब नहीं माना जाता, लेकिन इसी मिट्टी से निकलकर अथर्व ने यह साबित किया कि सपनों के लिए शहर का बड़ा होना जरूरी नहीं, हौसले का बड़ा होना जरूरी है। अकोला में रहकर उन्होंने शुरुआती क्रिकेट सीखा, स्थानीय मैदानों पर अभ्यास किया और धीरे-धीरे अपनी पहचान बनाई।
उनका जन्म स्थान आज भी उनके व्यक्तित्व में झलकता है। सादगी, जमीन से जुड़ाव और मेहनत की आदत उन्हें अपने शहर से मिली है। अथर्व कई बार इंटरव्यू में यह कह चुके हैं कि अकोला ने उन्हें धैर्य सिखाया और मुश्किल हालात में टिके रहना सिखाया। यही गुण आज उन्हें बड़े मंच पर भी अलग बनाते हैं।
परिवार का साथ: मजबूत नींव की कहानी
अथर्व तायडे का परिवार शिक्षित और सहयोगी रहा है। उनके पिता ययाति तायडे, जो एक प्रोफेसर हैं, ने हमेशा पढ़ाई और अनुशासन को महत्व दिया। वहीं उनकी मां देवयानी तायडे ने घर से उन्हें भावनात्मक सहारा दिया। उनकी बहन वैभवी तायडे, जो एक पेट्रोलियम इंजीनियर हैं, यह दिखाती हैं कि यह परिवार शिक्षा और मेहनत दोनों को बराबर महत्व देता है।
इस पारिवारिक माहौल ने अथर्व को संतुलित सोच दी है। यही वजह है कि वह मैदान पर भी ज्यादा भावुक नहीं होते, बल्कि शांत दिमाग से फैसले लेते हैं। परिवार का यही संस्कार उनके क्रिकेट सफर की मजबूत नींव बना।
क्रिकेट और पहचान
अथर्व तायडे को IPL 2023 में एक खास वजह से पहचाना गया, जब वह पंजाब किंग्स की ओर से खेलते हुए दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ 15वें ओवर में रिटायर आउट हुए। वह IPL इतिहास में ऐसा करने वाले दूसरे खिलाड़ी बने। उस मैच में उन्होंने 42 गेंदों पर 55 रन बनाए थे। यह फैसला उस वक्त चर्चा का विषय बन गया, लेकिन इसने यह भी दिखाया कि अथर्व टीम के हित को खुद से ऊपर रखते हैं।
यह घटना उनकी उम्र, कद या निजी जिंदगी से कहीं ज्यादा उनकी सोच को दर्शाती है। एक युवा खिलाड़ी का ऐसा फैसला लेना आसान नहीं होता, लेकिन अथर्व ने दिखाया कि वह सिर्फ व्यक्तिगत रिकॉर्ड नहीं, बल्कि टीम की जरूरत को समझते हैं।




