अब्रार अहमद: गलियों से टेस्ट क्रिकेट तक का जादुई सफ़र
कभी आपने सोचा है कि कोई लड़का, जो मोहल्ले में टेप बॉल से गेंद घुमा रहा हो, एक दिन दुनिया के सबसे बड़े बल्लेबाज़ों को टेस्ट क्रिकेट में नचा देगा? यही कहानी है अब्रार अहमद की। नाम सुनते ही आज क्रिकेट फैंस के दिमाग में एक ही चीज़ आती है – खतरनाक लेग स्पिन और बल्लेबाज़ों की नींद उड़ाने वाली गेंदें। लेकिन यह सफ़र आसान नहीं था। इसमें संघर्ष है, परिवार की कहानी है, सब्र है और खुद पर भरोसा है।
शुरुआती ज़िंदगी: आठ भाई-बहनों में सबसे छोटा सपना
अब्रार अहमद का जन्म 11 सितंबर 1998 को कराची में हुआ। वह अपने परिवार में सबसे छोटे हैं – पाँच भाई और तीन बहनें। इतने बड़े परिवार में पले-बढ़े अब्रार ने बचपन से ही ज़िंदगी को क़रीब से देखा। उनका परिवार मूल रूप से खैबर पख्तूनख्वा के मानसेहरा ज़िले के पास स्थित एक छोटे से गांव शिनकियारी से कराची आया था। परिवार पख़्तून है और स्वाती क़बीले से ताल्लुक रखता है।
उनके बड़े भाई शाहज़ाद ख़ान खुद एक फास्ट बॉलर रह चुके हैं और नेशनल बैंक के लिए खेल चुके हैं। यहीं से अब्रार के क्रिकेट की नींव पड़ी। मोहल्ले में टेप बॉल क्रिकेट खेलते हुए उनके टैलेंट को सबसे पहले उनके भाई ने पहचाना। अब्रार खुद मानते हैं कि अगर भाई ने उस वक़्त हौसला न दिया होता, तो शायद वह आज यहां न होते।
परिवार का साथ और पिता की सोच में बदलाव
हर क्रिकेटर की कहानी में परिवार का रोल बहुत बड़ा होता है, और अब्रार की कहानी भी इससे अलग नहीं है। उनकी मां और भाई-बहन शुरू से उनके साथ खड़े रहे। लेकिन पिता शुरुआत में क्रिकेट को करियर के रूप में लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं थे। यह बात अब्रार ने खुद एक इंटरव्यू में बताई थी।
धीरे-धीरे जब मेहनत रंग लाने लगी और अब्रार का नाम आगे बढ़ने लगा, तो पिता का नजरिया भी बदला। आज अब्रार गर्व से कहते हैं कि उनके पिता अब बहुत खुश हैं और उनके सबसे बड़े सपोर्टर बन चुके हैं। यह बदलाव अपने आप में अब्रार की मेहनत की जीत है।
हाफ़िज़-ए-क़ुरान और मैदान पर अनुशासन
अब्रार अहमद सिर्फ क्रिकेटर ही नहीं हैं, बल्कि वह हाफ़िज़-ए-क़ुरान भी हैं, यानी उन्होंने पूरा क़ुरान शरीफ़ याद किया हुआ है। यह बात उनके व्यक्तित्व में साफ दिखती है। मैदान पर उनका धैर्य, संयम और अनुशासन कहीं न कहीं उनकी परवरिश और धार्मिक शिक्षा से जुड़ा हुआ है।
जब बल्लेबाज़ उन्हें आक्रामक तरीके से खेलने की कोशिश करते हैं, तब भी अब्रार चेहरे पर मुस्कान रखकर अपनी लाइन-लेंथ पर टिके रहते हैं। यही चीज़ उन्हें अलग बनाती है।
घरेलू क्रिकेट: मेहनत की असली परीक्षा
अब्रार अहमद ने कराची की मशहूर राशिद लतीफ़ अकादमी से क्रिकेट की सही ट्रेनिंग ली। 2017 में उन्होंने पाकिस्तान सुपर लीग में कराची किंग्स के लिए टी20 डेब्यू किया। हालांकि शुरुआत में उन्हें ज्यादा मौके नहीं मिले, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
2020 में उन्होंने सिंध की तरफ से फर्स्ट क्लास क्रिकेट खेला और यहीं से उनका असली टेस्ट शुरू हुआ। घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन करने के बाद वह पाकिस्तान शाहीन टीम में चुने गए और श्रीलंका के दौरे पर गए। यहीं से चयनकर्ताओं की नजरें उन पर टिक गईं।
पाकिस्तान टीम में धमाकेदार एंट्री
दिसंबर 2022 में जब इंग्लैंड की टीम पाकिस्तान आई, तब किसी ने नहीं सोचा था कि दूसरा टेस्ट खेलने वाला यह नया लड़का इतिहास रच देगा। 9 दिसंबर 2022 को मुल्तान में अब्रार अहमद ने टेस्ट डेब्यू किया और ऐसा जादू दिखाया कि पूरी क्रिकेट दुनिया हैरान रह गई।
पहली पारी में उन्होंने 7 विकेट लिए और दूसरी पारी में 4 विकेट चटकाए। कुल मिलाकर 10 विकेट। वह 1995 के बाद टेस्ट डेब्यू में दस विकेट लेने वाले पहले पाकिस्तानी गेंदबाज़ बने। खास बात यह रही कि उन्होंने डेब्यू टेस्ट के पहले ही सेशन में पांच विकेट ले लिए, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड था।

स्पिन का नया चेहरा
अब्रार की गेंदबाज़ी सिर्फ विकेट लेने तक सीमित नहीं है। उनकी गुगली, फ्लिपर और हवा में घूमती गेंदें बल्लेबाज़ों को सोचने पर मजबूर कर देती हैं। इंग्लैंड जैसे आक्रामक बल्लेबाज़ों के खिलाफ भी उन्होंने डर नहीं दिखाया।
इसके बाद न्यूज़ीलैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज़ में भी उन्होंने पांच विकेट लेकर यह साबित कर दिया कि उनका प्रदर्शन कोई संयोग नहीं था, बल्कि मेहनत का नतीजा था।
टी20 और वनडे में पहचान बनाना
2024 में अब्रार अहमद को आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप के लिए पाकिस्तान टीम में शामिल किया गया। यह उनके करियर का एक और बड़ा पड़ाव था। इसके बाद नवंबर 2024 में उन्होंने ज़िम्बाब्वे के खिलाफ वनडे डेब्यू किया और 4 विकेट लेकर टीम को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
2025 एशिया कप में श्रीलंका के खिलाफ उनका 4 ओवर में 1 विकेट देकर सिर्फ 8 रन देना टी20 एशिया कप का रिकॉर्ड बन गया। 16 डॉट बॉल्स और सिर्फ 2 की इकॉनमी – यह किसी भी स्पिनर का सपना होता है।
साउथ अफ्रीका के खिलाफ करियर बेस्ट प्रदर्शन
नवंबर 2025 में साउथ अफ्रीका के खिलाफ घरेलू वनडे सीरीज़ के आखिरी मैच में अब्रार ने 4 विकेट देकर सिर्फ 27 रन दिए। साउथ अफ्रीका की मजबूत शुरुआत को उन्होंने दो ओवर में तीन विकेट लेकर तोड़ दिया। पाकिस्तान ने यह मैच आसानी से जीत लिया और अब्रार को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।
यह मैच साबित करता है कि अब्रार सिर्फ टेस्ट नहीं, बल्कि सीमित ओवरों के क्रिकेट में भी मैच विनर हैं।
चोट और संघर्ष का दौर
हर खिलाड़ी के करियर में मुश्किल समय आता है। 2023 में अब्रार को सायटिका नाम की बीमारी हो गई, जिससे उनके पैरों में दर्द और सुन्नपन रहने लगा। यह चोट ऑस्ट्रेलिया में एक प्रैक्टिस मैच के दौरान लगी और इसके कारण वह कई अंतरराष्ट्रीय मैचों से बाहर हो गए।
लेकिन अब्रार ने इस मुश्किल दौर को भी सब्र और हिम्मत के साथ झेला। रिहैब, फिजियो और मेहनत के दम पर उन्होंने वापसी की और एक बार फिर खुद को साबित किया।
निष्कर्ष: मेहनत, सब्र और हुनर का नाम है अब्रार अहमद
अब्रार अहमद की कहानी हमें यह सिखाती है कि टैलेंट अगर मेहनत और सब्र के साथ जुड़ जाए, तो कोई भी मंज़िल दूर नहीं होती। गलियों से लेकर टेस्ट क्रिकेट तक का यह सफ़र सिर्फ एक खिलाड़ी की नहीं, बल्कि हर उस इंसान की कहानी है जो सपने देखता है।
आज अब्रार अहमद पाकिस्तान क्रिकेट के सबसे भरोसेमंद स्पिनरों में गिने जाते हैं, और आने वाले सालों में उनसे और भी बड़े कारनामों की उम्मीद की जा रही है।




