शुरुआत: एक आम लड़के का बड़ा सपना
26 मई 2002 को जन्मे शिवांग कुमार बचपन से ही क्रिकेट के दीवाने थे। गली क्रिकेट से शुरुआत करने वाले शिवांग के लिए बल्ला और गेंद सिर्फ खेल का साधन नहीं थे, बल्कि उनका सपना थे। उनके पिता प्रवीण कुमार भी क्रिकेट से जुड़े रहे, इसलिए घर में खेल का माहौल था। यही वजह थी कि शिवांग को शुरू से ही क्रिकेट की बारीकियां समझने का मौका मिला।
शिवांग दाएं हाथ से बल्लेबाजी करते हैं और बाएं हाथ से wrist spin गेंदबाजी करते हैं, जो उन्हें एक खास ऑलराउंडर बनाता है। लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने का रास्ता आसान नहीं था।
जब लगा कि सब खत्म हो गया
हर खिलाड़ी की जिंदगी में एक ऐसा दौर आता है जब सब कुछ गलत होने लगता है। शिवांग के साथ भी ऐसा ही हुआ। जब उनका चयन अंडर-14 टीम में नहीं हुआ, तो वह काफी निराश हो गए। उन्हें लगा कि शायद क्रिकेट उनके लिए नहीं बना है। इस निराशा में उन्होंने करीब पांच महीने तक क्रिकेट से दूरी बना ली।
लेकिन कहते हैं न, अगर जुनून सच्चा हो तो वह आपको वापस खींच ही लाता है। शिवांग के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। एक दिन उन्होंने MS Dhoni: The Untold Story देखी, जिसमें MS Dhoni के संघर्षों को दिखाया गया था। इस फिल्म ने उनके अंदर की आग को फिर से जगा दिया।
उन्हें एहसास हुआ कि उन्होंने बहुत जल्दी हार मान ली थी। इसके बाद उन्होंने दोबारा क्रिकेट खेलना शुरू किया और वापसी के पहले ही मैच में 98 रन बनाकर साबित कर दिया कि उनमें अभी भी दम है।
घरेलू क्रिकेट में मेहनत का फल
वापसी के बाद शिवांग ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने लगातार मेहनत की और धीरे धीरे घरेलू क्रिकेट में अपनी पहचान बनानी शुरू की। मध्य प्रदेश के लिए खेलते हुए उन्होंने कई शानदार प्रदर्शन किए।
विजय हजारे ट्रॉफी में उनका प्रदर्शन बेहद शानदार रहा। सिर्फ तीन मैचों में 10 विकेट लेना कोई छोटी बात नहीं है। उनकी इकॉनमी भी काफी किफायती रही, जिससे साफ दिखता है कि वह सिर्फ विकेट लेने वाले गेंदबाज ही नहीं, बल्कि टीम के लिए भरोसेमंद खिलाड़ी भी हैं।
कर्नाटक जैसी मजबूत टीम के खिलाफ 5 विकेट लेना उनके करियर का एक बड़ा मोड़ साबित हुआ। इसके अलावा झारखंड के खिलाफ उन्होंने 67 रन की शानदार पारी खेली और साथ में विकेट भी लिए। इससे यह साबित हुआ कि वह एक सच्चे ऑलराउंडर हैं।
T20 में भी दिखाया दम
सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में भी शिवांग ने अपनी छाप छोड़ी। हालांकि विकेट ज्यादा नहीं मिले, लेकिन उनकी गेंदबाजी काफी किफायती रही। इसके अलावा अपने पहले ही सीनियर T20 मैच में 28 गेंदों पर 45 रन बनाकर उन्होंने यह दिखा दिया कि वह दबाव में भी अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं।
उनकी यही काबिलियत उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाती है। वह जरूरत पड़ने पर टीम के लिए रन भी बना सकते हैं और विकेट भी ले सकते हैं।
IPL 2026: सपना हुआ साकार
हर युवा क्रिकेटर का सपना होता है IPL में खेलना, और शिवांग का यह सपना 2026 में पूरा हुआ। Sunrisers Hyderabad ने उन्हें 30 लाख रुपये में खरीदा और Kolkata Knight Riders के खिलाफ उन्हें डेब्यू करने का मौका मिला।
अपने पहले ही मैच में उन्होंने बिना किसी डर के बल्लेबाजी की। आखिरी ओवर में उन्होंने पहली ही गेंद पर चौका लगाया, जो उनके आत्मविश्वास को दर्शाता है। हालांकि वह उसी ओवर की आखिरी गेंद पर आउट हो गए, लेकिन उन्होंने यह दिखा दिया कि वह बड़े मंच के लिए तैयार हैं।

टीमों के ट्रायल और संघर्ष
IPL तक पहुंचने का रास्ता भी आसान नहीं था। शिवांग ने कई टीमों के लिए ट्रायल दिए, जिनमें Punjab Kings, Mumbai Indians और Rajasthan Royals शामिल हैं। हालांकि उन्हें तुरंत मौका नहीं मिला, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
आखिरकार Sunrisers Hyderabad ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें अपनी टीम में शामिल किया। यह उनके धैर्य और मेहनत का परिणाम था।
दोस्ती और प्रेरणा का असर
शिवांग के करियर में उनके दोस्त अनिकेत वर्मा का भी बड़ा योगदान रहा। अनिकेत पहले से IPL में खेल रहे थे और उनका प्रदर्शन देखकर शिवांग को भी विश्वास हुआ कि वह भी इस स्तर तक पहुंच सकते हैं।
कभी कभी हमें खुद पर भरोसा करने के लिए किसी और की सफलता की जरूरत होती है, और शिवांग के लिए यह प्रेरणा उनके दोस्त से मिली।
परिवार का साथ: सबसे बड़ी ताकत
किसी भी खिलाड़ी के पीछे उसका परिवार एक मजबूत स्तंभ की तरह खड़ा होता है। शिवांग के लिए भी उनके पिता का समर्थन बहुत महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने हमेशा अपने बेटे को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया और मुश्किल समय में उनका हौसला बढ़ाया।
जब शिवांग ने क्रिकेट छोड़ने का फैसला किया था, तब भी उनके परिवार ने उन्हें समझाया और वापस मैदान पर लौटने के लिए प्रेरित किया।
आने वाला समय: एक बड़ा सितारा?
आज शिवांग कुमार IPL में अपना पहला कदम रख चुके हैं, लेकिन यह सिर्फ शुरुआत है। उनके पास वह हर गुण है जो एक बड़े खिलाड़ी में होना चाहिए। अगर वह इसी तरह मेहनत करते रहे, तो आने वाले समय में वह भारतीय टीम के लिए भी खेल सकते हैं।
उनकी गेंदबाजी में विविधता है, बल्लेबाजी में दम है और सबसे बड़ी बात, उनके अंदर सीखने और आगे बढ़ने की भूख है।
निष्कर्ष: सपने सच होते हैं
शिवांग कुमार की कहानी हमें यह सिखाती है कि जिंदगी में हार मानना सबसे बड़ी गलती होती है। अगर आप एक बार गिरते हैं, तो इसका मतलब यह नहीं कि आपका सफर खत्म हो गया। सही समय पर सही प्रेरणा मिल जाए, तो आप फिर से उठ सकते हैं और अपने सपनों को पूरा कर सकते हैं।
शिवांग ने यह साबित कर दिया है कि अगर दिल में जुनून हो और मेहनत करने का जज्बा हो, तो कोई भी सपना बड़ा नहीं होता। आज वह लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं, जो क्रिकेट या किसी भी क्षेत्र में अपना नाम कमाना चाहते हैं।
उनकी यह यात्रा अभी शुरू हुई है, और आने वाले समय में हम उनसे और भी बड़े कारनामों की उम्मीद कर सकते हैं।




