Sanjay Krishnamurthi Age ,Family, Biography: संजय कृष्णमूर्ति की उम्र, परिवार, जीवनी

Sanjay Krishnamurthi age,Family,Biography

संजय कृष्णमूर्ति: अमेरिका से भारत और फिर विश्व क्रिकेट तक का सफर

अगर आप क्रिकेट के शौकीन हैं और नई पीढ़ी के खिलाड़ियों की कहानियाँ पढ़ना पसंद करते हैं, तो संजय कृष्णमूर्ति की कहानी आपको जरूर पसंद आएगी। यह कहानी सिर्फ क्रिकेट की नहीं है, बल्कि पहचान, संघर्ष, मौके और सही समय पर लिए गए फैसलों की भी है। एक ऐसा लड़का, जो अमेरिका में पैदा हुआ, भारत में पला-बढ़ा और फिर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अमेरिका का नाम रोशन करने लगा। संजय की जिंदगी हमें यह सिखाती है कि अगर जुनून सच्चा हो, तो रास्ते अपने आप बनते चले जाते हैं।

जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि

संजय कृष्णमूर्ति का जन्म 2 जून 2003 को अमेरिका के ओरेगन राज्य के कॉर्वालिस शहर में हुआ। उनके पिता सत्‍य कृष्णमूर्ति भारतीय मूल के हैं और माँ जूली कृष्णमूर्ति अमेरिकी (कॉकसियन) पृष्ठभूमि से आती हैं। घर में दो संस्कृतियों का मेल था, लेकिन क्रिकेट के प्रति प्यार उन्हें अपने पिता से विरासत में मिला। उनके पिता क्रिकेट के बड़े प्रशंसक थे और यही वजह थी कि संजय का रुझान बचपन से ही इस खेल की ओर होने लगा।

हालाँकि जन्म अमेरिका में हुआ, लेकिन संजय का बचपन पूरी तरह अलग माहौल में बीता, जिसने उनके व्यक्तित्व और क्रिकेट करियर को नई दिशा दी।

बचपन और भारत से जुड़ाव

जब संजय सिर्फ आठ साल के थे, तब उनका परिवार भारत आ गया और बेंगलुरु में बस गया। भारत आकर संजय का क्रिकेट से रिश्ता और गहरा हो गया। यहाँ उन्होंने एक क्रिकेट अकादमी जॉइन की, जहाँ उनके खेल को सही दिशा मिलने लगी। भारत में क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं, बल्कि एक जुनून है, और इस जुनून ने संजय को भी पूरी तरह अपने रंग में रंग लिया।

स्कूल के दिनों में ही संजय ने यह दिखा दिया था कि उनमें कुछ खास है। शुरू में वे ज़्यादा गेंदबाज़ी पर ध्यान देते थे, लेकिन जब उन्होंने लगातार रन बनाना शुरू किया और ओपनिंग बल्लेबाज़ के तौर पर शानदार प्रदर्शन किया, तो उनका फोकस बल्लेबाज़ी की ओर चला गया।

प्रतिभा की पहचान और शुरुआती सफलता

संजय की प्रतिभा जल्दी ही लोगों की नज़र में आ गई। महज़ 11 साल की उम्र में उनका चयन अनिल कुंबले स्पिन स्टार टैलेंट हंट में हुआ। इसके बाद उन्होंने कर्नाटक अंडर-16 टीम का प्रतिनिधित्व भी किया। स्कूल क्रिकेट के दौरान उन्होंने छह मैचों में 500 से ज़्यादा रन बनाए, जो किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।

लेकिन यहीं से उनकी जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आया, जिसने उनके भविष्य की दिशा बदल दी।

नागरिकता का मुद्दा और बड़ा फैसला

संजय के पास भारतीय नागरिकता नहीं थी, बल्कि उनके पास ओवरसीज़ सिटिजनशिप ऑफ इंडिया यानी OCI कार्ड था। कर्नाटक क्रिकेट से जुड़े स्थानीय नियमों के कारण वे आगे राज्य स्तर पर खेलने के लिए अयोग्य घोषित कर दिए गए। यह किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए बहुत निराशाजनक स्थिति हो सकती थी।

लेकिन संजय और उनके परिवार ने इसे अंत नहीं, बल्कि एक नए रास्ते की शुरुआत माना। यही वजह थी कि उन्होंने अमेरिका में क्रिकेट के अवसरों की तलाश शुरू की। कभी-कभी जो चीज़ हमें रोकती हुई लगती है, वही आगे चलकर हमें सही मंज़िल तक पहुँचा देती है।

अमेरिका वापसी और नई शुरुआत

2019 में संजय ने मुंबई और ह्यूस्टन में बनने वाली मेजर लीग क्रिकेट के ट्रायल्स में हिस्सा लिया। 2020 में उन्हें ह्यूस्टन में एक क्रिकेट ट्रेनिंग कैंप के लिए बुलाया गया। यह यात्रा कुछ समय की होनी थी, लेकिन कोविड-19 महामारी ने सब कुछ बदल दिया। पूरा परिवार अमेरिका में ही फँस गया और भारत वापस नहीं लौट सका।

इस मुश्किल समय में भी संजय ने हार नहीं मानी। वे ऑनलाइन पढ़ाई के ज़रिए हाई स्कूल पूरा कर रहे थे। इसी दौरान उनके पिता को बे एरिया में नौकरी मिल गई और परिवार वहीं शिफ्ट हो गया। यह संजय के लिए एक बड़ा मौका था, क्योंकि अमेरिका के इसी क्षेत्र में क्रिकेट की अच्छी सुविधाएँ मौजूद थीं।

पढ़ाई और क्रिकेट का संतुलन

संजय सिर्फ क्रिकेटर ही नहीं, बल्कि पढ़ाई में भी तेज़ थे। भारत में रहते हुए उन्होंने वर्ल्ड रोबोट ओलंपियाड में राष्ट्रीय स्तर पर हिस्सा लिया था। तकनीक और कोडिंग में उनकी गहरी रुचि थी। इसी वजह से उन्होंने कंप्यूटर साइंस को अपने करियर के रूप में चुना।

2021 में उन्होंने सैन जोस स्टेट यूनिवर्सिटी, कैलिफ़ोर्निया में बैचलर ऑफ साइंस इन कंप्यूटर साइंस में दाख़िला लिया। खुद संजय के शब्दों में, उन्होंने वही यूनिवर्सिटी चुनी जो क्रिकेट और पढ़ाई, दोनों के लिए सबसे सही थी। बार-बार जगह बदलने के बाद वे अब स्थिरता चाहते थे।

घरेलू क्रिकेट से अंतरराष्ट्रीय मंच तक

जून 2021 में संजय का चयन माइनर लीग क्रिकेट में बे ब्लेज़र्स टीम के लिए हुआ। इसके कुछ ही महीनों बाद सितंबर 2021 में उन्हें ओमान ट्राई-नेशन सीरीज़ के लिए अमेरिका की ODI टीम में रिज़र्व खिलाड़ी के रूप में चुना गया। एक खिलाड़ी के चोटिल होने के बाद उन्हें प्लेइंग इलेवन में मौका मिला और 13 सितंबर 2021 को उन्होंने नेपाल के खिलाफ अपना ODI डेब्यू किया।

महज़ 18 साल की उम्र में ODI खेलने वाले संजय, अमेरिका के सबसे युवा खिलाड़ियों में शामिल हो गए।

टी20 क्रिकेट और फ्रेंचाइज़ी लीग्स

2024 में संजय ने मेजर लीग क्रिकेट में सैन फ्रांसिस्को यूनिकॉर्न्स की ओर से खेला और लॉस एंजेलिस नाइट राइडर्स के खिलाफ मैदान में उतरे। इसके बाद 20 फरवरी 2025 को उन्होंने ओमान के खिलाफ अपना टी20 इंटरनेशनल डेब्यू किया।

नवंबर 2025 में वे नेपाल प्रीमियर लीग में जनकपुर बोल्ट्स के लिए खेले। 2025-26 सीज़न में उन्हें इंटरनेशनल लीग टी20 में MI एमिरेट्स की टीम में शामिल किया गया, जहाँ उन्होंने घायल खिलाड़ी की जगह ली।

विश्व कप में चमकता सितारा

ICC मेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026 में संजय कृष्णमूर्ति अमेरिका की टीम के लिए एक अहम खिलाड़ी बनकर उभरे। फरवरी 2026 में भारत ए के खिलाफ वॉर्म-अप मैच में उन्होंने सिर्फ 18 गेंदों में 41 रन की विस्फोटक पारी खेलकर सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

यह पारी सिर्फ रन बनाने की नहीं थी, बल्कि यह संदेश थी कि संजय बड़े मंच के खिलाड़ी हैं और दबाव में भी बेहतरीन प्रदर्शन कर सकते हैं।

निजी जीवन और व्यक्तित्व

संजय कृष्णमूर्ति अभी अविवाहित हैं और हिंदू धर्म को मानते हैं। वे सोशल मीडिया पर भी सक्रिय रहते हैं और इंस्टाग्राम, फेसबुक और लिंक्डइन जैसे प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद हैं। क्रिकेट के अलावा उन्हें टेक्नोलॉजी, कोडिंग और नई चीज़ें सीखने में दिलचस्पी है।

निष्कर्ष

संजय कृष्णमूर्ति की कहानी हमें यह सिखाती है कि हालात चाहे जैसे भी हों, अगर इंसान में सीखने की ललक और आगे बढ़ने का जज़्बा हो, तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता। अमेरिका, भारत और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के बीच उनकी यात्रा आज के युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है। आने वाले समय में क्रिकेट जगत से संजय का नाम और भी ऊँचाइयों पर सुनाई देगा, इसमें कोई शक नहीं।

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