साहिबज़ादा फ़रहान: गलियों से इंटरनेशनल स्टेज तक का दमदार सफ़र
अगर आप क्रिकेट को सिर्फ़ बल्ला और गेंद का खेल समझते हैं, तो साहिबज़ादा फ़रहान की कहानी आपको यह सोच बदलने पर मजबूर कर देगी। यह कहानी है एक ऐसे लड़के की, जिसने टेनिस बॉल से खेलते हुए बड़े सपने देखे, मुश्किल हालात झेले, आलोचनाएँ सुनीं, लेकिन मैदान पर जवाब हमेशा अपने बल्ले से दिया। फ़रहान का सफ़र हमें यह सिखाता है कि अगर जुनून सच्चा हो, तो रास्ते खुद बन जाते हैं।
शुरुआती ज़िंदगी और क्रिकेट से पहला प्यार
साहिबज़ादा फ़रहान का जन्म 6 मार्च 1996 को ख़ैबर पख़्तूनख़्वा के चारसद्दा ज़िले में हुआ। यह वह इलाक़ा था जहाँ उस समय हार्ड बॉल क्रिकेट की सुविधाएँ नाम मात्र की थीं। बचपन में फ़रहान ने ज़्यादातर क्रिकेट टेप बॉल और टेनिस बॉल से ही खेला। मोहल्ले की गलियाँ, खाली मैदान और स्कूल के बाद का वक़्त—यहीं से उनके क्रिकेट के सपनों ने आकार लेना शुरू किया।
साल 2008 में जब उनका परिवार पढ़ाई के लिए पेशावर शिफ्ट हुआ, तब फ़रहान की ज़िंदगी ने नया मोड़ लिया। पेशावर जिमख़ाना क्लब से जुड़कर उन्होंने पहली बार प्रोफेशनल माहौल में क्रिकेट खेलना शुरू किया। हालाँकि परिवार के कुछ लोग क्रिकेट को करियर बनाने के पक्ष में नहीं थे, लेकिन उनके पिता ने उनके टैलेंट को पहचाना और खुलकर समर्थन किया। यही भरोसा आगे चलकर फ़रहान की सबसे बड़ी ताक़त बना।
गेंदबाज़ से बल्लेबाज़ बनने की दिलचस्प कहानी
शुरुआत में साहिबज़ादा फ़रहान एक तेज़ गेंदबाज़ बनना चाहते थे। करीब दो साल तक उन्होंने गेंदबाज़ी पर मेहनत की, लेकिन ज़्यादा मौके नहीं मिले और नतीजे भी कुछ ख़ास नहीं रहे। इसी दौरान एक लोकल मैच में उन्होंने बल्लेबाज़ी की और शानदार प्रदर्शन किया। दोस्तों और कोच ने उन्हें सलाह दी कि वे बल्लेबाज़ी पर ध्यान दें।
यहीं से फ़रहान की किस्मत ने करवट ली। उन्होंने हार्ड बॉल क्रिकेट में बतौर बल्लेबाज़ वापसी की और पीसीबी इंटर-डिस्ट्रिक्ट टूर्नामेंट में लगातार शतक जड़ दिए। इन पारियों ने उन्हें रातों-रात लोकल सर्किट में पहचान दिला दी और चयनकर्ताओं का ध्यान उनकी ओर गया।
अंडर-19 से फर्स्ट-क्लास तक का संघर्ष
लगातार अच्छे प्रदर्शन के बावजूद, जब फ़रहान को पेशावर अंडर-19 टीम में चुना गया, तब भी कई लोगों ने सवाल उठाए। लेकिन कोच फ़ज़ल-ए-अकबर ने उन पर भरोसा दिखाया। अंडर-19 स्तर पर फ़रहान ने अपने खेल से साबित कर दिया कि वे सिर्फ़ किस्मत से नहीं, बल्कि काबिलियत से यहाँ पहुँचे हैं।
हालाँकि उनका फर्स्ट-क्लास डेब्यू आसान नहीं था। 2016 में अपेंडिसाइटिस की सर्जरी के कारण उनका डेब्यू टल गया। यह एक मुश्किल दौर था, लेकिन फ़रहान ने हार नहीं मानी। उसी साल 1 अक्टूबर 2016 को उन्होंने क़ायदे-आज़म ट्रॉफी में पेशावर की ओर से फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में कदम रखा।
घरेलू क्रिकेट में रन मशीन की पहचान
घरेलू क्रिकेट में साहिबज़ादा फ़रहान ने खुद को एक भरोसेमंद टॉप-ऑर्डर बल्लेबाज़ के रूप में स्थापित किया। 2017 पाकिस्तान कप में बलोचिस्तान के लिए सबसे ज़्यादा रन बनाकर उन्होंने सबका ध्यान खींचा। 2018 पाकिस्तान कप में पंजाब के लिए खेलते हुए उन्होंने ओपनिंग मैच में 155 रन की यादगार पारी खेली और मैन ऑफ द मैच बने।
इसके बाद सिंध और फिर ख़ैबर पख़्तूनख़्वा के लिए खेलते हुए फ़रहान लगातार रन बनाते रहे। 2021-22 नेशनल टी20 कप में 447 रन बनाकर वे टूर्नामेंट के टॉप स्कोरर बने और इसी प्रदर्शन के दम पर उन्हें पीसीबी का “डोमेस्टिक क्रिकेटर ऑफ द ईयर” चुना गया। यह अवॉर्ड उनके करियर का एक बड़ा पड़ाव साबित हुआ।

रिकॉर्ड्स से भरा टी20 सफ़र
2024-25 नेशनल टी20 कप साहिबज़ादा फ़रहान के करियर का सुनहरा अध्याय बन गया। सेमी-फाइनल में पेशावर की ओर से खेलते हुए उन्होंने एबटाबाद के ख़िलाफ़ 72 गेंदों में 148 रन ठोक दिए। इस टूर्नामेंट में उन्होंने सिर्फ़ छह पारियों में 588 रन बनाए और बाद में कुल 605 रन के साथ प्लेयर ऑफ द सीरीज़ बने।
यहीं नहीं, क्वेटा के ख़िलाफ़ 162 रन की पारी खेलकर उन्होंने पाकिस्तान के किसी बल्लेबाज़ का सबसे बड़ा टी20 स्कोर बनाने का रिकॉर्ड भी अपने नाम किया। इस तरह फ़रहान सिर्फ़ रन ही नहीं बना रहे थे, बल्कि इतिहास भी रच रहे थे।
पाकिस्तान सुपर लीग और नई पहचान
2025 पाकिस्तान सुपर लीग में इस्लामाबाद यूनाइटेड के लिए खेलते हुए फ़रहान ने साबित किया कि वे बड़े मंच के खिलाड़ी हैं। छह मैचों में 184 रन, 165 से ज़्यादा का स्ट्राइक रेट और लगातार आक्रामक शुरुआत—इन सबने उन्हें टीम का अहम हिस्सा बना दिया। पावरप्ले में तेज़ रन बनाना और गैप्स ढूँढना उनकी सबसे बड़ी खासियत बनकर उभरी।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी और धमाकेदार प्रदर्शन
फ़रहान ने 2018 में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ टी20 इंटरनेशनल डेब्यू किया था, लेकिन असली पहचान उन्हें 2025 के बाद मिली। बांग्लादेश के ख़िलाफ़ लाहौर में खेली गई 74 रन की पारी ने सबको याद दिलाया कि घरेलू क्रिकेट का यह रन मशीन इंटरनेशनल लेवल पर भी आग उगल सकता है।
वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ सीरीज़ में साइम अयूब के साथ उनकी ओपनिंग जोड़ी खूब चली। एशिया कप 2025 में जसप्रीत बुमराह के ख़िलाफ़ लगाए गए छक्कों ने उन्हें सुर्खियों में ला दिया। उसी साल उन्होंने कैलेंडर ईयर में 100 से ज़्यादा टी20 छक्के लगाकर इतिहास रच दिया।
विवाद और आलोचनाओं का सामना
हर बड़े खिलाड़ी की तरह फ़रहान के करियर में भी विवाद आए। एशिया कप 2025 में भारत के ख़िलाफ़ मैच के दौरान उनके सेलिब्रेशन को लेकर विवाद हुआ। हालांकि फ़रहान ने साफ़ कहा कि यह जश्न अचानक था और किसी भावना को ठेस पहुँचाने के लिए नहीं था। आईसीसी ने उन्हें चेतावनी दी, लेकिन इस विवाद ने उनके खेल पर कोई असर नहीं डाला।
निष्कर्ष: मेहनत, हिम्मत और भरोसे की मिसाल
साहिबज़ादा फ़रहान की कहानी सिर्फ़ क्रिकेट की कहानी नहीं है, यह हर उस युवा के लिए प्रेरणा है जो सीमित साधनों के बावजूद बड़े सपने देखता है। गलियों से लेकर इंटरनेशनल स्टेडियम तक का उनका सफ़र यह साबित करता है कि अगर इरादे मज़बूत हों, तो हालात मायने नहीं रखते। आज फ़रहान सिर्फ़ एक क्रिकेटर नहीं, बल्कि पाकिस्तान क्रिकेट के उभरते सितारे हैं, जिनसे आने वाले समय में और भी बड़ी उम्मीदें जुड़ी हैं।




