जब ज़िंदगी अँधेरे में थी, तब LMAD ने रास्ता दिखाया
कभी-कभी ज़िंदगी में ऐसा वक्त आ जाता है जब सब कुछ होते हुए भी लगता है कि कुछ भी नहीं बचा। अंदर से खालीपन, दिमाग में उलझन और दिल में डर—बस यही रह जाता है। जून 2022 से पहले मेरी ज़िंदगी भी कुछ ऐसी ही थी। उस दिन मेरी बहन ने मुझे पंचगनी के एशिया प्लेटो में होने वाली एक कॉन्फ्रेंस के लिए रजिस्टर कर दिया, जिसका नाम था Let’s Make A Difference (LMAD)। सच कहूँ तो मुझे बिल्कुल नहीं पता था कि ये 8 दिन मेरी ज़िंदगी को हमेशा के लिए बदल देंगे। मैं अपनी मर्जी से नहीं गया था, बस अपनी बहन पर भरोसा करके गया था।
मेरी बहन ने LMAD सालों पहले, 2007 और 2011 में अटेंड किया था। इतने साल बाद भी उसकी आँखों में वो चमक थी, जो सिर्फ किसी गहरे अनुभव से आती है। वो हमेशा कहती थी, ये कॉन्फ्रेंस तुम्हारी आँखें खोल देगी। उस वक्त मैं समझ नहीं पाया, लेकिन आज जानता हूँ—वो गलत नहीं थी।
टूटे वादों के बीच खोया हुआ मैं
LMAD से पहले मैं ज़िंदगी के सबसे अंधेरे दौर से गुजर रहा था। कोई बहुत अपना, जिसने हमेशा साथ रहने का वादा किया था, अचानक चला गया। मैंने अपनी पूरी दुनिया उसी इंसान के इर्द-गिर्द बना ली थी। जब वो रिश्ता टूटा, तो ऐसा लगा जैसे सब कुछ ढह गया हो—मेरे सपने, मेरा आत्मविश्वास, मेरा भविष्य।
जिस उम्र में मुझे करियर पर ध्यान देना चाहिए था, उस उम्र में मैं भावनाओं में डूबा हुआ था। मैं अपने परिवार के बारे में भी नहीं सोच पा रहा था, जो हमेशा मेरी खुशी चाहते थे। मैं इतना अपरिपक्व हो चुका था कि यह भी नहीं समझ पा रहा था कि मैं खुद को किस दिशा में ले जा रहा हूँ। मैं बस खो गया था।
पहली बार खुद से मिलने का अनुभव: Quiet Time
LMAD के पहले ही सेशन में Quiet Time के बारे में बताया गया। चुपचाप बैठकर खुद से बात करना, अपने भीतर झाँकना—ये सब मेरे लिए बिल्कुल नया था। मैंने पहले कभी ऐसा नहीं किया था।
लेकिन जब मैंने कोशिश की, तो अंदर कुछ हिल सा गया। पहली बार मैंने अपनी गलतियों को देखा। यह समझा कि मैंने खुद को कितना नुकसान पहुँचाया और मेरे फैसलों से मेरे परिवार को कितना दर्द हुआ।
उस दिन मैंने पहली बार सच्चा पछतावा महसूस किया। और वही पछतावा मेरे बदलाव की शुरुआत बन गया।
हर दिन, खुद के और करीब
जैसे-जैसे कॉन्फ्रेंस के दिन बीतते गए, मैं और गहराई में जाने लगा। मैं ज़्यादा लोगों से घुलता-मिलता नहीं था। बस खुद के साथ रहता था—अपने दर्द, अपने बीते कल और अपने फैसलों का सामना करता हुआ।
लेकिन उस जगह की ऊर्जा कुछ अलग ही थी। वॉलंटियर्स की सच्चाई, माहौल की पवित्रता और हर किसी की ईमानदारी—सब मिलकर ऐसा लग रहा था जैसे मैं बिल्कुल सही जगह पर, सही वक्त पर हूँ।
आख़िरी बेंच से मंच तक का सपना
उसी दौरान मुझे LMAD के Fellowship Program के बारे में पता चला। छह युवा, जिन्होंने अपनी ज़िंदगी के सात महीने इस मूवमेंट को दिए थे। जब मैंने उन्हें देखा—उनकी आँखों में साफ़ उद्देश्य, चेहरे पर आत्मविश्वास—तो कुछ भीतर क्लिक कर गया।
मैं हॉल की आख़िरी बेंच पर बैठा था और खुद से कहा,“एक दिन मैं भी उस मंच पर रहूँगा।”
सातवाँ और आठवाँ दिन: उम्मीद और हल्कापन
सातवें दिन फेलोज़ ने अपनी जर्नी शेयर की। उनकी कहानियों में मैंने खुद को देखा। पहली बार लगा कि शायद मेरी ज़िंदगी भी पटरी पर लौट सकती है। उम्मीद पैदा हुई, और उसी उम्मीद ने मुझे ताकत दी।
आठवें और आख़िरी दिन ऐसा महसूस हुआ जैसे दिल से कोई भारी बोझ उतर गया हो। मैं रोया, मैंने खुद को माफ़ किया, अपने पुराने रूप को पत्र लिखा और खुद से कुछ सच्चे वादे किए। मैं उसी ज़िंदगी में वापस नहीं जाना चाहता था। मैं एक नया रास्ता चुन चुका था।
कॉन्फ्रेंस के बाद की नई शुरुआत
LMAD के बाद मैंने लेक्चरर के रूप में काम शुरू किया। नौकरी के साथ-साथ मैंने रोज़ Quiet Time जारी रखा। धीरे-धीरे सब कुछ ठीक होने लगा।
मुझे Bhanpura और Jamshedpur में LMAD के रीजनल कॉन्फ्रेंस में वॉलंटियर करने का मौका मिला। वहाँ छात्रों से बात करते हुए मैंने वही दर्द, वही उलझन देखी, जिससे मैं खुद गुज़रा था। और पहली बार मुझे लगा कि मैं किसी की मदद कर पा रहा हूँ—क्योंकि मैं वही रास्ता चल चुका था।
दिसंबर वर्कशॉप: भीतर की सफ़ाई
फिर आया December Workshop—और भी गहरा, और भी सच्चा अनुभव। इस वर्कशॉप ने मुझे मेरे पैटर्न, डर और मूल्यों को समझने में मदद की। ऐसा लगा जैसे अपने अंदर के घर की पूरी सफ़ाई कर ली हो।
जब सपना हकीकत बना: Fellowship
एक बातचीत में मैंने यूँ ही Viral Sir से कहा कि मैं Fellowship करना चाहता हूँ। उस वक्त उन्होंने कुछ नहीं कहा। लेकिन कुछ दिनों बाद उन्होंने मुझे मौका दिया।
सात महीने की Fellowship मेरी ज़िंदगी का सबसे ताकतवर दौर रहा। हर सुबह Quiet Time और योग से शुरू होती थी। हमने LMAD की कोर टीम के साथ मिलकर भारत भर में 11 इवेंट्स किए। 2200 से ज़्यादा लोगों से मिला, हर किसी की अपनी कहानी थी।
हम IAS अफसरों, फाउंडर्स और लीडर्स से मिले, लेकिन सबसे बड़ी सीख उनके पद से नहीं, बल्कि उनकी सादगी, शांति और सेवा-भाव से मिली।
खोया हुआ खुद, फिर से मिला
इन सात महीनों में मैंने वो पाया, जो सालों पहले खो चुका था—खुद को।
फेलोशिप के बाद मैं Site Engineer के रूप में काम पर लौटा, लेकिन अब मैं वही इंसान नहीं था। मेरे पास स्पष्टता थी, मूल्य थे और एक मकसद था। लोग मुझे सिर्फ मेरे काम के लिए नहीं, बल्कि मेरे स्वभाव के लिए सम्मान देने लगे।
जीवन की नई सौगातें
फिर मेरी शादी हुई। और LMAD ने मुझे जो परिवार दिया था, वो उस दिन सच में दिखा—देशभर से मेरे LMAD दोस्त मेरी शादी में आए। ये सिर्फ दोस्ती नहीं, आजीवन रिश्ते हैं।
मेरी पत्नी ऐश्वर्या ने मुझमें आए बदलाव को देखा और हमेशा साथ दिया। शादी के बाद उसने भी LMAD कॉन्फ्रेंस अटेंड की। मेरे लिए ये एक full circle moment था।
आज की सच्चाई
आज जब समाज में कोई मेरी तारीफ करता है, तो मैं जानता हूँ कि इसका श्रेय LMAD और मेरे माता-पिता को जाता है। मैं आज भी Quiet Time करता हूँ। आज भी खुद को परखता हूँ। और आज भी उन मूल्यों के साथ जीता हूँ, जो मैंने जून 2022 के उन 8 दिनों में सीखे थे।
आभार
Viral Sir—जब मुझे खुद पर भरोसा नहीं था, तब आपने मुझ पर किया। आप सिर्फ मेंटर नहीं, मेरे लिए मार्गदर्शक हैं।
और मेरी LMAD फैमिली—मेरे सबसे बुरे और सबसे अच्छे समय में साथ देने के लिए धन्यवाद।




